


ललित जैन राणापुर
नगर में नूतन वर्ष ओर दादा गुरुदेव श्रीमद राजेंद्र सुरीश्वरजी के स्वर्गारोहण की द्वि शताब्दी वर्ष निमिती आध्यात्मिक ऊर्जा और धार्मिक उत्साह का एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। श्री सोधर्मतपोगच्छीय त्रिस्तुतिक
श्री त्रिस्तुतिक जैन संघ, राणापुर द्वारा दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेंद्र सुरीश्वरजी महाराज साहिब के द्वि-शताब्दी महोत्सव के पावन उपलक्ष्य में आयोजित ‘सिद्धांचल भावयात्रा’ भव्यता के साथ संपन्न हुई।
पुण्य सम्राट श्रीमद जयंतसेन सूरी के पट्टधर राणापुर नंदन गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज की प्रेरणा और पूज्या श्री शशिकला श्रीजी महाराज की शिष्या सा. श्री अनंतदृष्टा श्रीजी एवं सा. मयूरकला श्रीजी महाराज आदि ठाना 36 के पावन सानिध्य में पूरा नगर गुरु भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
पचरंगी ध्वज और जयकारों से गूंजा नगर, पाठशाला के बच्चों ने दिखाया उत्साह
प्रातः 9 बजे स्थानीय राजेंद्र भवन से भव्य शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। शोभायात्रा में श्री यतीन्द्र जयंत पाठशाला के नन्हे बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे। बच्चे अपने हाथों में पुण्य सम्राट दादा गुरुदेव की तस्वीर उठाए और जैन ध्वज लहराते हुए चल रहे थे। परमात्मा के जयकारों और बच्चों के उत्साह ने मार्ग के वातावरण को धर्ममय बना दिया। यह यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों— महात्मा गांधी मार्ग, सुभाष मार्ग, चंद्रशेखर मार्ग, जवाहर मार्ग, सरदार मार्ग, तिलक गली और शिवाजी चौक से गुजरी,
लाभार्थी सोहनलाल सेठ परिवार ने अपने निवास पर सभी समाजजनों को तिलक कर संघ पूजा की
सिद्धगिरी महातीर्थ शाश्वत है, इसके कण-कण में परमात्मा: साध्वी मयूरकला श्रीजी
शोभायात्रा पुनः राजेंद्र भवन पहुंची, जहां धर्मसभा का आयोजन हुआ। सभा को संबोधित करते हुए साध्वी श्री मयूरकला श्रीजी महाराज ने सिद्धगिरी (पालीताना) महातीर्थ की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि “सिद्धांचल महातीर्थ शाश्वत है। यहाँ भगवान आदिनाथ ने पूर्व नवाणू (99) बार यात्रा की है। इस तीर्थ के कण-कण में परमात्मा विराजमान हैं और इसकी भावपूर्ण स्पर्शना करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।” साध्वी जी ने अपने प्रवचन में दादा गुरुदेव राजेंद्र सुरीश्वरजी के जीवन के अनेक प्रेरक वृतांत सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अतिथियों, लाभार्थी परिवार और 15 मुमुक्षु बहनों का हुआ बहुमान
इस गरिमामय अवसर पर श्री संघ की ओर से झाबुआ से पधारे संजय मेहता, मुकेश नाकोडा और बड़वाह से पधारे संजय भंडारी का बहुमान किया गया। कार्यक्रम के मुख्य लाभार्थी श्री सोहनलाल सेठ परिवार (राणापुर/इंदौर) का भी श्री संघ ने भावभीना बहुमान किया। वहीं, संयम पथ की ओर अग्रसर 15 मुमुक्षु बहनों का बहुमान सोहनलाल सेठ एवं अनिल सेठ परिवार की ओर से किया गया। इस दौरान श्री यतीन्द्र जयंत पाठशाला के बच्चों ने शिक्षाप्रद प्रस्तुतियां दीं, जिसकी समस्त समाजजनों ने सराहना की।
कुशल संचालन और आभार
संपूर्ण कार्यक्रम का सफल और प्रभावी संचालन सुरेश समीर ने किया। कार्यक्रम के अंत में मनोज सेठ ने सभी पधारे हुए अतिथियों, धर्मप्रेमियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। अंत में लाभार्थी परिवार की ओर से आयोजित स्वामी वात्सल्य (भोज) के साथ इस ऐतिहासिक महोत्सव का समापन हुआ।
