ललित जैन राणापुर (झाबुआ):
आदिवासी समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से मिटाने और समाज को एक नई दिशा देने के लिए राणापुर ब्लॉक में समाज के वरिष्ठों और तड़वी बंधुओं की एक विशाल जाजम (बैठक) आयोजित की गई। इस महापंचायत में करीब 2000 लोगों ने हिस्सा लिया और समाज हित में कई कठोर एवं अनुकरणीय निर्णय लिए।
कुरीतियों के खिलाफ फिर से उठी आवाज
विगत वर्षों से समाज सुधारक दहेज, शराब और डीजे जैसी बुराइयों के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। पूर्व में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल के ‘मिशन 3’ अभियान से मिली सफलता के बाद, बीच के समय में आई शिथिलता को देखते हुए समाज ने फिर से एकजुट होने का संकल्प लिया है।
बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय:
समाज को आर्थिक और मानसिक बोझ से बचाने के लिए सर्वसम्मति से निम्नलिखित नियम लागू किए गए हैं:
दहेज प्रथा पर लगाम: अब दहेज के रूप में अधिकतम 2 लाख 25 हजार रुपए की राशि तय की गई है।
चांदी के बदले नकद: चांदी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए निर्णय लिया गया कि वधू पक्ष चांदी के स्थान पर 50 हजार रुपए नकद देगा।
नशा और डीजे प्रतिबंधित: शादियों और कार्यक्रमों में विदेशी शराब और डीजे को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। इसके स्थान पर पारंपरिक स्थानीय वाद्ययंत्रों को बढ़ावा दिया जाएगा।
युवाओं पर ध्यान: वक्ताओं ने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने और उन्हें पेप्सी, कोका-कोला जैसे व्यसनों और सोशल मीडिया के ‘खतरनाक स्टंट्स’ से दूर रहने की सलाह दी।
”समाज को एकसूत्र में पिरोने और नई पीढ़ी को बर्बादी से बचाने के लिए हमें इन कुरीतियों को त्यागना ही होगा। हमारे पारंपरिक वाद्ययंत्र हमारी पहचान हैं, उन्हें फिर से जीवित करना होगा।” – प्रमुख वक्ता
मंच से आह्वान
सभा को श्यामा ताहेड, बहादुर हठीला, कैलाश डामोर, रमेश मेडा (सरदारपुरा), गोविंद अजनार सहित कई वरिष्ठ वक्ताओं ने संबोधित किया। वक्ताओं ने अभिभावकों को अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने और उन्हें सही राह दिखाने के लिए प्रेरित किया। उपस्थित जनसमूह ने करतल ध्वनि (तालियों की गड़गड़ाहट) के साथ इन निर्णयों का समर्थन किया।कार्यक्रम का सफल संचालन गुलाब सिंह अमलियार और कैलाश डामोर द्वारा किया गया।
