भव्य कलश यात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ, स्वामी शांतिप्रियदास जी ने दिया स्वच्छता और धर्म का संदेश

ललित जैन राणापुर

नगर के वृंदावन धाम स्थित श्री कृष्ण गार्डन में गुरुवार को सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य और श्रद्धापूर्ण शुभारंभ हुआ। कथा की शुरुआत से पूर्व मालीपुरा स्थित रणछोड़ राय मंदिर से एक विशाल एवं भव्य कलश यात्रा निकाली गई। मुख्य यजमान गोवर्धन भाई रामाजी गुर्जर के नेतृत्व में निकली यह शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई कथा स्थल वृंदावन धाम पहुंची।

पारंपरिक नृत्य और भक्ति के रंग में रंगा नगर

कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा और चुनरी धारण कर सिर पर मंगल कलश लिए सहभागिता की। बैंड-बाजों, ढोल-नगाड़ों और गूंजते भक्ति गीतों ने पूरे राणापुर नगर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। यात्रा के दौरान आदिवासी समाज की पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं, जिन्हें देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और सभी ने इसकी मुक्त कंठ से सराहना की।

विधि-विधान से हुआ महापुराण का पूजन

कलश यात्रा के कथा स्थल पहुंचने पर मुख्य यजमान गोवर्धन भाई रामाजी गुर्जर, सह-यजमान कंचन कांति कुंज हरसोला परिवार तथा मांगीलाल रूपचंद राठौड़ परिवार द्वारा श्रीमद्भागवत महापुराण का विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात दोपहर लगभग 1 बजे परम पूज्य कथावाचक शास्त्री स्वामी श्री शांतिप्रियदास जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन प्रारंभ किया।

“केवल नाम जपना पर्याप्त नहीं, देश-समाज को स्वच्छ रखना भी ईश्वर सेवा”: स्वामी जी

अपने प्रथम दिन के प्रवचन में स्वामी शांतिप्रियदास जी महाराज ने भक्ति के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा:

“केवल भगवान का नाम जपना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने सामाजिक कर्तव्यों का भी निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए। देश और समाज को स्वच्छ रखना भी ईश्वर सेवा का ही एक रूप है।”

स्वामी जी ने अपने 17 से 18 बार के विदेश प्रवासों का जीवंत उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के लोग सार्वजनिक स्थलों पर कचरा नहीं फैलाते और स्वच्छता के प्रति बेहद जागरूक हैं। उन्होंने आह्वान किया कि यदि हम भी अपने घर, मोहल्ले और नगर को स्वच्छ रखने का संकल्प लें और ‘स्वच्छ भारत अभियान’ में सक्रिय भागीदारी निभाएं, तभी भगवान के नाम का सच्चा अर्थ सार्थक होगा।

शास्त्र ही देते हैं मानव जीवन को सही दिशा

धर्म की व्याख्या करते हुए स्वामी जी ने कहा कि भारत की संस्कृति “अनेकता में एकता” का अनुपम संदेश देती है। आज के समय में समाज को अपने धर्मग्रंथों और शास्त्रों के ज्ञान को जीवन में उतारने की सख्त जरूरत है। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण की रचना महर्षि वेदव्यास ने की थी। शास्त्र ही मानव जीवन को सही दिशा, संस्कार और चरित्र प्रदान करते हैं, जिससे व्यक्ति धर्म, सदाचार और मानवता के मार्ग पर आगे बढ़ता है।

श्रद्धालुओं से धर्म लाभ लेने की अपील

कथा के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भक्तिमय वातावरण में भगवान की महिमा का रसपान किया। कार्यक्रम के समापन पर आयोजन समिति ने क्षेत्र के समस्त धर्मप्रेमी जनता से प्रतिदिन कथा में उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने तथा अपने जीवन को आध्यात्मिक मूल्यों से समृद्ध बनाने का सादर आग्रह किया है।

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