ललित जैन राणापुर
नगर की जीवनरेखा और आस्था का केंद्र राणा सागर तालाब अब अपनी दुर्दशा के दिन भूलकर एक नए स्वरूप में लौटने को तैयार है। वर्षों की उपेक्षा और पिछली योजनाओं की तकनीकी खामियों के बाद, वर्तमान नगर परिषद ने तालाब के शुद्धिकरण के लिए ‘आर-पार’ की जंग का ऐलान कर दिया है।
पुरानी गलतियों से सबक: अब ‘लीपापोती’ नहीं, ठोस समाधान
तालाब को बर्बाद करने वाले 5 मुख्य नालों का मुद्दा दशकों पुराना है। पिछली परिषदों के समय सीवर इंटरसेप्टर की योजनाएं बनीं, करोड़ों खर्च हुए, लेकिन तकनीकी खामियों ने सब मिट्टी में मिला दिया। वर्तमान परिषद ने इन खामियों को पहचान कर अमृत 2.0 और स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत एक ऐसी योजना तैयार की है, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
4.31 करोड़ का ‘मास्टर प्लान’: क्या बदलेगा?
परिषद अध्यक्ष दीपमाला नलवाया के प्रयासों से स्वीकृत 4 करोड़ 31 लाख रुपये की यह योजना केवल कागजी नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से सशक्त है:
STP (Sewage Treatment Plant): गंदे पानी को सीधे तालाब में जाने से पहले आधुनिक प्लांट में शुद्ध किया जाएगा।
इंटरसेप्शन डायवर्जन: नालों के बहाव को मोड़कर उन्हें सीवर लाइन से जोड़ा जाएगा, ताकि एक बूंद गंदगी भी तालाब के पवित्र जल में न मिल सके।
पारदर्शिता पर जोर: पिछले कामों (जैसे 29 लाख की पिचिंग) में गड़बड़ी दिखने पर अध्यक्ष ने उसे तुरंत रुकवाकर यह संदेश दिया है कि ‘काम होगा तो सिर्फ गुणवत्ता वाला’।
अधूरे कार्यों को पूरा करने का संकल्प
परिषद के सामने पिछली परिषदों के छोड़े हुए ‘कांटों’ की भी चुनौती है। चाहे वह 5 साल से अधूरा सवा करोड़ का कलवर्ट बॉक्स हो या अधूरा सीमांकन—वर्तमान परिषद इन सभी को व्यवस्थित करने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। तार फेंसिंग का कार्य इस बात का प्रमाण है कि परिषद तालाब की भूमि को सुरक्षित करने के प्रति गंभीर है।
“राणा सागर सिर्फ एक तालाब नहीं, हमारी विरासत है। पिछली योजनाओं में क्या कमियां रहीं, हम उनसे सीख रहे हैं। 4.31 करोड़ का नया प्रोजेक्ट तालाब की तकदीर बदल देगा। मेरा संकल्प है कि जनता की गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा तालाब की शुद्धि में ही लगे। काम में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
— दीपमाला नलवाया, अध्यक्ष, नगर परिषद राणापुर
उम्मीदों का नया सवेरा
नगरवासियों को अब वर्तमान परिषद से काफी उम्मीदें हैं। जिस तरह से अध्यक्ष ने गुणवत्ता के सवाल पर खुद काम रुकवाकर कड़ा रुख अपनाया है, उससे जनता में यह भरोसा जागा है कि इस बार 4.31 करोड़ रुपये नालों में नहीं बहेंगे, बल्कि राणा सागर को उसका खोया हुआ गौरव वापस दिलाएंगे।
