


ललित जैन राणापुर
“इंसान को जीवन के अंतिम पड़ाव पर तो सुकून मिलना चाहिए, लेकिन रानापुर में स्थिति इसके उलट है।” नगर के मुक्तिधाम के ठीक समीप पूरे शहर का कचरा डंप किए जाने से यहाँ आने वाले लोग इस कचरे के ढेर को देख स्थानीय परिषद को कोसने पर मजबूर हैं। प्रशा7सन की कथित अनदेखी और टेंडर प्रक्रियाओं में उलझे सिस्टम के कारण जहाँ अपनों को अंतिम विदाई दी जाती है, वहाँ अब कचरे का विशाल पहाड़ खड़ा हो गया है।
नरकीय स्थिति: नाक पर रुमाल रख दी जा रही अंतिम विदाई
नगर परिषद की लापरवाही के चलते इस पवित्र स्थान के पास गंदगी का अंबार लगा है। अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले परिजनों को भीषण दुर्गंध और मच्छरों के तांडव के बीच खड़ा होना पड़ता है। हवा चलने पर कचरा उड़कर सीधे मुक्तिधाम परिसर के भीतर पहुँच जाता है, जो जन-संवेदनाओं के साथ सीधा खिलवाड़ है।
लाखों का निवेश बना सफेद हाथी
मुक्तिधाम के समीप लगभग 16 लाख की लागत से ‘मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर’ बनाया गया, लेकिन वह भी अनुपयोगी पड़ा है। इसी तरह 13 लाख रुपयों की लागत का एक और सेंटर निर्माणाधीन है । वहीं लगभग एक लाख रुपए की लागत से बने ‘विध्वंश अपशिष्ट संग्रहण केंद्र’ भी अब खंडहर में तब्दील हो रहे हैं। इन संसाधनों का उपयोग नहीं होने के पीछे तर्क है कि जनता सूखा और गीला कचरा अलग-अलग नहीं रखती, इसलिए इनका उपयोग नहीं हो पा रहा है।
अध्यक्ष का पक्ष: 4 बार कोशिश, 4 बार नाकामी
नगर परिषद अध्यक्ष सुश्री दीपमाला नलवाया ने बताया कि ‘स्वच्छ भारत मिशन 2.0’ के तहत कचरा निस्तारण के लिए 2.03 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया में हुई विफलताओं का ब्यौरा साझा किया:
प्रथम कॉल: समय सीमा समाप्त होने के कारण प्रक्रिया रुकी।
द्वितीय कॉल: तकनीकी कारणों से प्रक्रिया निरस्त की गई।
तृतीय कॉल: चयनित फर्म ने अनुबंध नहीं किया, जिस पर उसकी अमानत राशि जब्त कर उसे ब्लैकलिस्ट करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
चतुर्थ कॉल: टेंडर में प्राप्त दरें अव्यावहारिक पाई गईं, इसलिए इसे निरस्त करना पड़ा।
अब आगे क्या?
अध्यक्ष सुश्री नलवाया के अनुसार, परिषद अब 5वीं बार निविदा (5th Call) की कार्यवाही करने जा रही है। वहीं इंजीनियर अर्पित हटीला का कहना है कि यदि 2.03 करोड़ का यह कार्य शुरू हो जाता है, तो कचरे की छंटनी कर उसे नष्ट किया जा सकेगा और यह जगह खाली हो जाएगी। फिलहाल, जब तक नया ठेकेदार नहीं मिल जाता, रानापुर की जनता को इस दुर्गंध से मुक्ति मिलना चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।
