


ललित जैन राणापुर
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर, देवाधिदेव प्रभु आदिनाथ भगवान का जन्मकल्याणक महोत्सव आज राणापुर नगर में अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। श्री संघ श्री मुनिसुव्रत स्वामी जिनालय राणापुर एवं अ. भा. श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद् के तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव में सुबह से लेकर देर रात तक धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों की धूम रही।
गौ-सेवा: जीव-दया का अनुपम उदाहरण
शाम 4:30 बजे, श्री संघ और नवयुवक परिषद् के सदस्यों ने श्री राज राजेंद्र जयंत गोपाल गौशाला पहुँचकर गौ-ग्रास (गौ-सेवा) का पुनीत कार्य किया । जिसकी शुरुआत दीप प्रज्वलित करने के पश्चात सामूहिक नवकार मंत्र सुना कर किया । लाभार्थी स्व. श्री केशरीमल जी छाजेड़ (पारा) परिवार की ओर से आयोजित इस सेवा कार्य में उपस्थित जनसमूह ने गायों को हरि सब्जी और चारा खिलाकर जीव-दया के संस्कार को चरितार्थ किया।
संस्कारों की संध्या: नन्हे मुन्नों की मनमोहक प्रस्तुति शाम की आरती के पश्चात, श्री चारित्र आराधना भवन में एक विशेष संध्या का आयोजन हुआ। श्री यतीन्द्र जयंत ज्ञान पाठशाला के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने आदिनाथ भगवान के जीवन पर आधारित हृदयस्पर्शी कविताएं और प्रेरक प्रसंग सुनाए। बच्चों की इस प्रस्तुति ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पाठशाला के शिक्षकों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रमों का उद्देश्य बच्चों में जैन धर्म के गौरवशाली इतिहास और संस्कारों को रोपना है।
आध्यात्मिक समापन: प्रतिक्रमण
दिनभर के आयोजनों के बाद, सायं 7:30 बजे अष्टमी तिथि के उपलक्ष्य में प्रतिक्रमण की क्रिया संपन्न हुई। आत्म-शुद्धि के इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में समाजजनों ने भाग लिया और प्रभु के चरणों में अपनी वंदना अर्पित की।
भक्तिपूर्ण सुबह: स्नात्र पूजा और पंचकल्याणक पूजन
महोत्सव का आगाज़ सुबह 8:30 बजे प्रभु भक्ति के साथ हुआ। श्री हितेश जी जैन के लाभार्थी परिवार की उपस्थिति में प्रभु का मनमोहक स्नात्र पूजन संपन्न हुआ। इसके पश्चात, दोपहर 1:30 बजे महिला मंडल के स्वरबद्ध भजनों के बीच आदिनाथ पंचकल्याणक पूजा पढ़ाई गई। इस पूजन के लाभार्थी चन्द्रसेन कटारिया एवं मोतीलाल कटारिया परिवार रहे। केसरिया वस्त्रों सजी महिलाओं ने प्रभु के गुणों का गान कर संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
