
ललित जैन राणापुर
कभी-कभी एक छोटा सा कमरा और एक बड़ा सपना पूरे शहर की किस्मत बदल देता है। राणापुर की गलियों में पली-बढ़ी एक बेटी ने आज वो कर दिखाया, जिसकी चर्चा अब हर घर में हो रही है। पूजा मुकेश चौधरी ने न केवल न्यायाधीश (जज) की परीक्षा पास की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि अगर इरादा पक्का हो, तो मंजिल को झुकना ही पड़ता है।
क्या था वो संकल्प?
पूजा ने ‘मालवा न्यूज नेटवर्क’ को एक्सक्लूसिव जानकारी देते हुए बताया कि उनका लक्ष्य केवल एक था— जज बनना। वकालत की 3 साल की पढ़ाई (LLB) और 2 साल की ज्यूडिशियल परीक्षा के दौरान उन्होंने किसी और विकल्प के बारे में सोचा तक नहीं। दिन-रात किताबों के बीच बिताए गए वो घंटे आज एक गौरवशाली परिणाम में तब्दील हो चुके हैं। अहमदाबाद के गुजरात यूनिवर्सिटी से उन्होंने यह परीक्षा पास की ।
एक अदृश्य ताकत: माता-पिता का साथ
इस सफलता के पीछे एक ऐसी कहानी भी है, जो हर माता-पिता को प्रेरित करेगी। पूजा ने अपनी इस ऐतिहासिक जीत का श्रेय अपने माता-पिता के ‘स्पोर्ट’ और उनके अटूट विश्वास को दिया है। जब समाज की बेटियां अपने सपनों को बुन रही होती हैं, तब पूजा के माता-पिता उनके साथ एक ढाल बनकर खड़े रहे।
बेटी की कामयाबी पर पिता का छलका प्यार
सफलता की खबर मिलते ही पूजा के पिता मुकेश जी चौधरी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अपनी लाड़ली को जज बनते देख वे खुशी से झूम उठे। उन्होंने भरे गले से अपनी बेटी की मेहनत की सराहना की। पिता का यह उत्साह और आंखों की चमक बता रही थी कि एक बेटी की सफलता पिता के लिए दुनिया की सबसे बड़ी दौलत होती है। उन्होंने बताया कि मेरी बेटी हमेशा टॉपर ही रही । साथ ही धर्म में भी उसकी रुचि रही और धार्मिक परीक्षा में भी वो हमेशा अव्वल ही रही ।
पूरे नगर में खुशी का माहौल
जैन समाज और राणापुर के लिए यह मात्र एक परीक्षा परिणाम नहीं, बल्कि एक नया इतिहास है। पूजा की इस उपलब्धि ने क्षेत्र की हजारों बेटियों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है। पूजा चौधरी की इस सफलता पर पूरे नगर में खुशी का माहौल है । जैन समाज ही नहीं अपितु अन्य नगर वासी भी नगर की बिटिया की उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर बधाई दे रहे है ।
