
ललित जैन राणापुर
परंपराएं जब पर्यावरण के संरक्षण के साथ जुड़ जाती हैं, तो वे समाज के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है राणापुर के वार्ड क्रमांक 06 स्थित गरुडा गली के रहवासियों ने। जहाँ सदियों से होलिका दहन के लिए पेड़ों की लकड़ियों का उपयोग होता आ रहा था, वहीं इस साल गरुडा गली ने इस रीत को पूरी तरह बदल दिया।
लकड़ी मुक्त होलिका दहन
इस बार गरुडा गली में होलिका दहन के लिए एक भी पेड़ की टहनी का उपयोग नहीं किया गया। इसके स्थान पर वार्ड वासियों ने पूर्ण रूप से गौकाष्ठ (गोबर से बनी लकड़ी) और उपलों का उपयोग कर पर्व मनाया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना और वनों के कटाव को रोकना है।
धुएं में भी ‘शुद्धता’ का अहसास
वार्ड के युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर यह निर्णय लिया कि आस्था के इस पर्व में प्रकृति को नुकसान नहीं पहुँचाया जाएगा। जानकारों का मानना है कि गौकाष्ठ के जलने से निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करता है और हानिकारक बैक्टीरिया को खत्म करता है, जबकि लकड़ी जलाने से केवल कार्बन उत्सर्जन बढ़ता है।
”हमने तय किया था कि हम अपनी परंपरा को आधुनिक और ईको-फ्रेंडली तरीके से मनाएंगे। गरुडा गली की यह शुरुआत अब पूरे राणापुर के लिए एक संदेश है।” — स्थानीय रहवासी, वार्ड 06
