परमात्मा पाषाण नहीं जीवंत सत्ता हैं, दिखावे की नहीं श्रद्धा की पूजा करें” — साध्वी श्री मयूर कला श्रीजी

राणापुर में 38 साध्वीजी और 13 मुमुक्षुओं के सानिध्य में ऐतिहासिक पत्रिका लेखन समारोह संपन्न; 26 अप्रैल को होगी प्रतिष्ठा

ललित जैन ​राणापुर

नगर के धार्मिक इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। आगामी 26 अप्रैल को होने वाले नूतन जिन मंदिर प्रतिष्ठा समारोह हेतु पत्रिका लेखन मुहूर्त का भव्य आयोजन पूज्य साध्वी मयूर कला श्रीजी महाराज साहब की पावन निश्रा में संपन्न हुआ। इस अवसर पर राणापुर की धरा 38 साध्वी महाराज और संयम पथ पर बढ़ने को आतुर 13 मुमुक्षुओं के चरणों से धन्य हो उठी।

श्रद्धा और विवेक का संदेश

​अपने ओजस्वी उद्बोधन में साध्वी श्री मयूर कला श्रीजी ने वर्तमान समय में बढ़ते दिखावे पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा— “आजकल मंदिरों में विराजित प्रतिमाओं को केवल दर्शनीय बना दिया गया है। हमारी श्रद्धा और आस्था भटक रही है। हम दिखावे के तौर पर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। यदि हम पूर्ण श्रद्धा और विवेकपूर्ण रहकर प्रतिमा की ओर ध्यान केंद्रित करें, तो साक्षात परमात्मा दिखाई देने लगते हैं। शास्त्र सिद्ध करते हैं कि परमात्मा पाषाण नहीं, जीवंत सत्ता हैं।”

राजशाही अंदाज में सजा आयोजन स्थल

​राजेंद्र भवन के द्वितीय माले पर आयोजित इस समारोह में राजशाही अंदाज में सजावट की गई थी। प्रतिष्ठा महोत्सव के लाभार्थियों के लिए विशेष स्थान सुरक्षित किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान कुल 51 पत्रिकाओं पर वैभवशाली तीर्थों, श्री संघों, आचार्य भगवंतों और गच्छाधिपति जी के नाम पूरी श्रद्धा के साथ अंकित किए गए।

पत्रिका विमोचन और लाभार्थी

​कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी श्री के मंगलाचरण से हुआ। संघ के वरिष्ठ सोहनलाल सेठ, दिलीप सकलेचा, चंद्रसेन कटारिया, अनिल सेठ और शैलेश सेठ ने पत्रिका का विमोचन कर साध्वी श्री को समर्पित किया।

  • पूजन का लाभ: परमात्मा, गुरुदेव और पत्रिका पर केसर-चंदन व अक्षत से वधाने का लाभ सुजानमल जी सेठ एवं विपुल जी सेठ ने लिया।
  • कामली का लाभ: साध्वी श्री को कामली व्होराने का सौभाग्य सोहनलाल जी सेठ को प्राप्त हुआ।
  • बहुमान: समस्त लाभार्थियों का बहुमान मांगीलाल जी सकलेचा परिवार की ओर से किया गया।

अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

​इस अवसर पर झाबुआ जिले के विभिन्न नगरों से गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिनमें सुजानमल जी सेठ (राजगढ़), प्रदीप डूंगरवाल (जोबट) और संजय मेहता (झाबुआ) प्रमुख थे। कार्यक्रम का सफल संचालन सुरेश समीर ने किया, जबकि प्रतिष्ठा महोत्सव समिति के अध्यक्ष तरुण सकलेचा ने सभी का आभार व्यक्त किया।​धार्मिक आयोजन के पश्चात श्री चारित्र आराधना भवन में सकल संघ का स्वामीवात्सल्य आयोजित किया गया।

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